दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए चल रही कामधेनु योजना के तहत केवल २२ पशुपालको को ऋण स्वीकृत किया गया है जबकि योजना के तहत ३० पशुपालको को लाभ पहुचाने का लक्ष्य था इसके बावजूद पशुधन विभाग का दावा है की कामधेनु योजना लक्ष्य पूर्ण कर चुकी है
पशुपालन ,दुग्धउत्पादन एवं ग्रामीण स्तर पर रोजगार को बढ़ाने के लिए मिनी कामधेनु योजना की शुरुआत की गयी जिसके तहत व्याजमुक्त ऋण देकर किसानो को प्रत्साहित किया गया । योजना के तहत ५०-५० पशुओं का आवंटन किया गया जिसमे गयों और भैसों की उन्नत प्रजातियों का वितरण किया गया । योजनानुसार कुल लगत का २५ प्रतिशत पशुपालकों को स्वयं जमा करना था शेष ७५ प्रतिशत बैंकों द्वारा ऋण के रूप में प्राप्त कर जमा करना था मिनी कामधेनु योजना में ३० लाभार्थियों के चयन का लक्ष्य था परन्तु इस योजना में अभी तक मात्र २२ लोगो को ही ऋण स्वीकृत किया गया है और मात्र ८ क्रियाशील इकाइयों की स्थापना की गयी है ।
लाभार्थियों के चयन के लिए ऐसे लोगो को वरीयता देने का नियम था जिन्होंने पहले भी पशुपालन किया हो । इसके अतिरिक्त लाभार्थी के पास शेड के आलावा कम से कम एक एकड़ भूमि होना आवश्यक है मिनी कामधेनु योजना के तहत लाभार्थियों को ५२ लाख रुपयो की कुल लागत का २५ प्रतिशत १३ लाख रुपये मार्जिन मनी के रूप में जमा करना होता है जिससे केवल बड़े किसानो को ही लाभ मिल पाया इसके पहले भी कामधेनु योजना के तहत बड़े किसानो को ही लाभ मिल पाया था । छोटे किसानो और पशुपालको को लाभ पहुचने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा माइक्रो कामधेनु योजना की चर्चा चल रही है जिसके तहत २५-२५ पशुओ का आवंटन कर मार्जिन मनी घटाकर छोटे किसानो को भी लाभ पहुचाया जायेगा । अब देखना है की पशुधन विभाग छोटे किसानों पर कब मेहरबान होगा ।
पशुपालन ,दुग्धउत्पादन एवं ग्रामीण स्तर पर रोजगार को बढ़ाने के लिए मिनी कामधेनु योजना की शुरुआत की गयी जिसके तहत व्याजमुक्त ऋण देकर किसानो को प्रत्साहित किया गया । योजना के तहत ५०-५० पशुओं का आवंटन किया गया जिसमे गयों और भैसों की उन्नत प्रजातियों का वितरण किया गया । योजनानुसार कुल लगत का २५ प्रतिशत पशुपालकों को स्वयं जमा करना था शेष ७५ प्रतिशत बैंकों द्वारा ऋण के रूप में प्राप्त कर जमा करना था मिनी कामधेनु योजना में ३० लाभार्थियों के चयन का लक्ष्य था परन्तु इस योजना में अभी तक मात्र २२ लोगो को ही ऋण स्वीकृत किया गया है और मात्र ८ क्रियाशील इकाइयों की स्थापना की गयी है ।
लाभार्थियों के चयन के लिए ऐसे लोगो को वरीयता देने का नियम था जिन्होंने पहले भी पशुपालन किया हो । इसके अतिरिक्त लाभार्थी के पास शेड के आलावा कम से कम एक एकड़ भूमि होना आवश्यक है मिनी कामधेनु योजना के तहत लाभार्थियों को ५२ लाख रुपयो की कुल लागत का २५ प्रतिशत १३ लाख रुपये मार्जिन मनी के रूप में जमा करना होता है जिससे केवल बड़े किसानो को ही लाभ मिल पाया इसके पहले भी कामधेनु योजना के तहत बड़े किसानो को ही लाभ मिल पाया था । छोटे किसानो और पशुपालको को लाभ पहुचने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा माइक्रो कामधेनु योजना की चर्चा चल रही है जिसके तहत २५-२५ पशुओ का आवंटन कर मार्जिन मनी घटाकर छोटे किसानो को भी लाभ पहुचाया जायेगा । अब देखना है की पशुधन विभाग छोटे किसानों पर कब मेहरबान होगा ।