Friday, 6 May 2016

परीक्षा परिणाम आने की ख़ुशी

सुबह ६ बजे सोकर उठा  ही था कि पापा ने आवाज लगाई अनंत रिजल्ट कितने बजे आ रहा है???सारी नींद हवा में  उड़ गयी...मैंने जवाब दिया पापा २ बजे तक आने की सम्भावना है |
पापा को मेरे रिसल्ट का हमेशा मुझसे ज्यादा बेसब्री से इन्तेजार रहता था ; कारण बिलकुल स्पष्ट था,पापा मेरे लिए एक साथ शिक्षक,पिता और माँ तीनों की भूमिका में होते थे| माँ की भूमिका में इसलिए क्योकि तब मै, भैया और पापा के साथ गोण्डा में रहता था| मम्मी उस समय गाँव वाले घर पर रहा करती थी...इसलिए  मुझे लेकर उनकी उत्सुकता हमेशा सामान्य पिता से कई गुना अधिक होती थी...औ आज तो वैसे भी मेरी एक वर्ष की और पापा के 14 वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम आने वाला था...
आज तो मैंने सुबह ही नहाकर सबसे पहले पूजा की | ये इस साल की मेरी दुसरी पूजा थी | पहली पापा ने कराई थी वो भी तब; जब मेरे इसी सत्र का पहला दिन था| मुझे आज तक नहीं समझ आया की पापा जो स्वयं कभी मंदिर नहीं जाते थे,उस दिन मुझे मदिर ले जाने के पीछे क्या विचार किया होगा???सोचता हूँ कभी पूछुंगा????
 खैर पूजा करने के बाद मै रोज की तरह अपना दैनिक काम करने कि कोशिश करने लगा | पर मन तो परीक्षा परिणाम में लगा हुआ था | क्या होगा??अगर कुछ गड़बड़ हुआ तो पापा क्या कहेंगे??कॉलोनी के लोग क्या कहेंगे?? यही सोच-सोचकर कभी हिंदी के पेपर में छूटा हुआ प्रश्न याद करके पछताता तो कभी रसायन के  सभी प्रश्नों के सही होने का गर्व भी होता | रिजल्ट के इन्तेजार का समय कितना उहापोह भरा होता है;साल २००८ मुझे खूब बता रहा था और मै समझ पा रहा था| उस दिन मैंने अपने प्रश्नपत्रों को कम से कम ५० बार देखा होगा और ढेर सारे तरीकों से जोड़ घटा के नंबर जुटाने का प्रयास रहा था | मान लो हिंदी में ६५ ही मिले तो इंग्लिश और केमिस्ट्री कवर कर लेगी |सोचते -सोचते दिमाग का दही हुआ जा रहा था | पापा ऑफिस जा चुके थे | मेरे मन में उथल-पुथल मची हुई थी| कभी घर के बाहर जाता कभी अन्दर आता ,कभी खिड़की से पापा के आने की राह निहारता | २ बज चुके थे और मेरी धड़कन बढ़ हुई थी | थोड़ी देर बाद राधे(कालोनी का ही एक लड़का) दौड़ता हुआ आया था| मै घर के बहार बैठकर खुद को सांत्वना दे रहा था,सब बढ़िया होगा,तुम्हारा रिजल्ट अच्चा नहीं होगा तो किसका होगा, अब क्या डरना जो होना होगा ,होगा ही  आदि आदि | राधे पास आकर बोला भैया अभी सरबर डाउन है |
समय बीत नही रहा था और दिमाग बुलेट ट्रेन हो गया था| थोड़ी देर बाद मुझे पापा की गाडी आती दिखाई दी | पापा घर आ चुके थे | मेरी चेहरे की भाव भंगिमा छण-छण में बदल रही थी | पापा के साथ पाण्डेय अंकल जी भी थे | पापा ने मुझसे सिर्फ इतना ही कहा गाडी लॉक कर दो और पीछे मिठाई रखी है ले आओ | पापा का भाव थोडा रूखा लग रहा था मुझे एहसास होने लगा कि मेरे मार्क्स अच्छे नहीं हैं क्योंकि पापा के चेहरे पर जीत वाली ख़ुशी नहीं थी |मेरे अन्दर आते ही -
पापा- पाण्डेय जी को पानी पिलाओ और दो कप काफी बनाओ|
मै अन्दर से मीठा और पानी ले आया,ग्लास को टेबल से उठाते हुए पापा ने कहा "पास तो हो गये हैं आप"|
मेरी आँखों में आंशु भर आये, लगभग रोने ही वाला था कि पाण्डेय अंकल जी ने कहा अनंत आपने अच्छे अंको के साथ परीक्षा पास की है पर मिश्रा जी आपके नंबर से संतुष्ट नहीं हैं | यह वर्ष सन 2008 का था और यू पी बोर्ड हाई स्कूल का रिजल्ट महज 39 % था  | मेरे कॉलेज ( राजकीय इंटर कॉलेज गोंडा) में मात्र 9 छात्र प्रथम श्रेणी में पास थे | मेरे स्कूल में मेरा तृतीय स्थान था; मै 68.16 अंको के साथ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो गया था |
तब से ढेर सारी परीक्षाएं पास की और वर्तमान समय में इलाहबाद विश्विद्यालय का छात्र हूँ और आज  एम. ए पत्रकारिता जनसंचार तृतीय सेमेस्टर .की परीक्षा 52 प्रतिशत अंको के साथ उत्तीर्ण की है | मुझे नहीं पता के मुझे खुश होना चाहिए या नहीं | मेरी आँखों में उस दिन की तरह आज भी आंशु है पर मै आज भी निकाल नहीं सकता....

किसकी कमियां निकालू किसको दोषी ठहराऊ |
जमाना ही कहता है के घर से निकल जाऊं
चाहत नहीं है मेरी बगावत करने की
फिर क्या करूं, हारकर यूँ बैठ जाऊ ||||

जब तक तोडेगें नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं|