Thursday, 31 March 2016

जिंदगी जीने के तरीके

मेरी माँ मेरे लिए खाना पकती है ये उसका कर्त्तव्य है ,पिता न जाने किन विषम परिस्थितियों में पैसे काम कर लातें हैं ,ये उनका कर्त्तव्य है | हमें हर जगह दूसरों का कर्त्तव्य दिखाई पड़ता है जैसे हमारा कोई कर्तव्य ही न हो |
गर्मियों में भी चूल्हे की आंच के  सामने जब एक माँ भोजन पकाती है और एक पिता ४५ डिग्री सेल्सिउस तापमान होने के बावजूद भरी दोपहरी में जब चार पैसे कामने के लिए तपता है तो उसे अपने पिता होने का कर्त्तव्यबोध नहीं बल्कि वात्सल्यबोध होता है | उस वक्त उन्हें चूल्हे और ज्येष्ठ की तपन नहीं अपने बच्चो की खुशी याद आती है | एक माँ सोचती है  बढ़िया भोजन करके मेरा बेटा खुश हो जायेगा और एक पिता सोचता है की इन पैसो से उसकी वो जरूरते पूरी करूंगा जो मै नहीं कर पाया | पर क्या हमारा इतना भी फर्ज नहीं बनता इसके एवज हम अपने माँ पिता को धन्यावाद ज्ञापित करे | शब्द जरुर छोटे है मगर इनमे चमत्कारिक ताकत है | इन शब्दों से इंसान जीवंत हो उठता है | वो खुद को उर्जावान महसूस करता है |
तो हर उस इंसान को जिसने कभी आपकी खुशी के लिए कुछ किया हो शुक्रिया जरूर कहें .....

ख़ूबसूरत,शुक्रिया काबिलेतारीफ
                  शब्द हैं शब्दों का कमाल देख ले
इंसानियत जिन्दा रहती है इन चंद लफ्जों से
                 एक बार कह के देख ले एक बार सुन के देख ले ॥॥ 

Wednesday, 30 March 2016

एक माँ की आवाज

उन बच्चों को समर्पित जो सस्ती लोकप्रियता के आडम्बर में अपनी माँ से बगावत कर रहे हैं
ऐसी ही एक माँ की पुकार

मै तेरी माँ हूँ मेरी पुकार सुन ले
मानकर तू-हार मेरी एक बार सुन ले
न लगा नारे मेरी बर्बादी के
मै तेरी हर बात सुनती हूँ
तू मेरी एक बार सुन ले

तू ठहराता है सही मेरा अपमान करने वालों की
याद रख तेरा वजूद मुझसे है मै तुझसे नहीं
बार-बार सुन ले हर बार सुन ले
तुझे लगता है मेरी बर्बादी के बाद तू रहेगा बड़े शान से
हटा गफलत का ये आइना औ
अपनी जमहूरियत  में बर्बादी का अंजाम देख ले |

Tuesday, 29 March 2016

रिश्ता होने का अर्थ

                                  रिश्ता (भाई ) होने का अर्थ 

        गलत होने पर समर्थन करना ये भाई होने का भाव नहीं प्रस्तुत करता बल्कि गलत होने पर उसके दंड में सहभागिता व्यक्ति के भाई होने का अर्थ प्रस्तुत करती है| यही हमारे समाज और संस्कृति की पहचान है |
न्याय अपनी जगह ,अन्याय अपनी जगह और रिश्ते अपनी जगह | सनातन धर्म भी इसी बात का समर्थन करता है की किसी व्यक्ति के कर्मो का फल उसके परिवार को भी भुगतना पड़ता है अपने भाई से खुस होना, नाराज होना इससे सुख दुःख की सहभागिता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता | यही प्रकृति का नियम 
है; और नियति भी इसी नियम का पालन करती आयी है | परन्तु आधुनिकता के इस युग में इंसान नियति के इस नियम को बदलने की कोशिश में लगा है | ऐसी अवस्था ही क़यामत का लक्षण होती है |

युवा (youth)

                                     


                                 युवा क्या है ? क्यों जरूरी है युवा? क्या कर सकता है युवा जिसकी हर इन्सान को ,देश को ,समाज को जरूरत है?तो दोस्तों मै आपको बताना चाहूँगा युवा व्यक्ति की  वह अवस्था है जब उसके विचार चिंगारी से अंगार बन जाये उसके इरादे टहनी से पतवार बन जाये | इतिहास में लिखित उन देशभक्तों का नाम है ,क्रांतिकारियों का नाम है,विचारको का नाम है जिन्होंने देश ,समाज और मानवता की की बेहतरी के लिए हमेशा त्याग किया ,बलिदान दिया और इतिहास को बदल कर रख दिया |
                                परन्तु अफ़सोस की हमारा आज का युवा बंदिशों में जकड़ा हुआ है| जिसकी खुद की स्वतंत्रता को उसके ही समाज ने उसके ही माता पिता ने बाधित किया है सिर्फ इस दर से की कही वो अपने बच्चो को खो न दे | मेरा अनुरोध है उन माताओं से उन पिताओ से उस समाज से की किसी डर से अपने बच्चो की स्वतंत्रता को न बाधित करे उन्हें अपनों पैरो पर खड़े होने दे चलने दे, लड़खड़ाने दे, गिरने दे र खुद सम्हालने दे  ऐसे में मुनौअर राना जी की ये लाइने सजीव प्रतीत होती है |
                                              हवा के रुख पर रहने दो ये चलना सीख जायेगा
                                              की बच्चा लड़खड़ाएगा तो चलना सीख जायेगा 
                                 अपनों बच्चो को भरोसा  दे अपने प्यार का प्रेरित करे आगे बढ़ने के लिए और फिर देखिया युवा को , उसकी छमता को ,साहस  को उसके मजबूत इरादों को | आप देखेंगे  की क्रांति कैसे होती है , आप पायेगे के इतिहास कैसे बनता है |
                                  दोस्तों जिंदगी जीने मरने का नाम नहीं है जिन्दादिली का नाम है एक ही दिन जियो पर ऐसे की लोग याद रख सके | कैफ़ी जी की लाइने 
                                               जिन्दा रहने के मौसम बहुत है मगर 
                                               जान देने की रुत रोज आती नहीं 
                                               इश्क और हुश्न को रुशवा करे 
                                               वो जवानी जो खून से नहाती नहीं 
                                  तो दोस्तों जिन्दगी जिन्दादिली के साथ जिए तभी सच्चे अर्थो में आप युवा कहलाने के लायक होंगे |
                                                                                                                                       अनन्त निमोशी 
                                
                             

Saturday, 26 March 2016

WRITE

what to write ,
                 I know not
To whom is to fight
                 I know not
I love YoU
                 This is fact
YOU dont realise 
                 Infact
Love is like a way
                 greatones' frequently say
Is it everything and all?
                Love is something and Life is ALL.
                                              ANANT NIMOSHI

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Friday, 25 March 2016

अंतर्द्वंद्व

जब भी लिखने बैठता हूँ सबसे पहले अपने ऊपर नजर दौड़ता हूँ;अपने ऊपर मतलब अपने आचरण पर ,अपने विचार पर अपने कर्मो पर; अपने सोचने के तरीकों पर ; जी मै आज अपनी बात करूंगा केवल अपनी | सुबह उठते ही अपने आस पास के विचारों से सामना होता है | कोई ब्राह्मणवादी बातें करता है और उसके पक्ष में सैकड़ो तर्क देता ,कोई छत्रियों का क्षत्रियत्व बतलाता है,कोई दलित अत्याचार की कहानी सुनाता है...बाहर निकलता हूँ तो हिंदुत्व और इस्लाम की बाते सुनता हूँ | लोग जहर बोते रहते है | मै मन ही मन सोचता हूँ आज खूब गालियाँ  लिखूंगा | आज मै भी जहर उगलूँगा | लोग भ्रस्टाचार पर लम्बे लम्बे भाषण देते है | मै सुनता हूँ | स्थिति परिस्थिति  के हिसाब से अपनी प्रतिक्रिया भी देता हूँ | बड़ा है तो सुन लेता हूँ; छोटा है तो उचित अनुचित समझाने का प्रयास करता हूँ | हर रोज कुछ इसी प्रकार की घटनाये घटित होती है | कभी कभी ये सब देखकर मन उदास भी होता है |लिखने की बारी अक्सर रात में आती है | शुरू करने से पहले ही मै सोचने पर मजबूर होता हूँ कि कौन सही है; और कौन गलत?? मेरा शांत दिमाग मुझे बताता है की आप पहले खुद को जानो आप क्या करते हो?
मै क्या करता हूँ ????
न मैं तो ग़रीब की मदद करता हूँ, लोगों से प्यार से बात करता हूँ, सबकी इज्ज़त करता हूँ,संस्कार तो मेरे खून में न मिटने वाले पदार्थ की तरह मिला हुआ है....हेंह! मेरे ऊपर शक...
अच्छा ये बताओ कि अगर कोई तुम पर अविश्वास करे, कोई तुम्हे कलुषित समझे,कोई तुम्हारा तिरस्कार करे या कोई तुम्हारी हर  बात पर टिप्पणी कर तब???...तब भी तुम उदार बने रहते हो???
नही, बिल्कुल नही। कोई मुझे अब कहता है तो मैं उसे क्या बे कह कर संबोधित करते हूँ; मैं कोई गाँधी थोड़े हूँ...हेंह...
अच्छा ये बताओ कि कभी तुमने किसी से ईर्ष्या नही की??
क्यों नही की; बिल्कुल की, जो मुझसे करता है, मैं भी उससे करता हूँ...करूँ क्यों न; मैं भगवान थोड़े हूँ
अब प्रश्न ये है कि सीधे, उल्टे तौर पर मैं भी लगभग वैसा ही करता हूँ जैसा लोग करते हैं; मात्रा कम या ज़्यादा हो सकती है, पर ऐसा क्यों???
अस्तित्व का संकट; जब मेरा मैं मुझे कचोटता है कि बेटा ये तो तुम्हारे अस्तित्व को नकार रहा है... तो मैं वो सब करता हूँ जो मेरी अपनी नज़र में अनैतिक है।
मै सचमुच पाता हूँ की मै भी लोगों से ज्यादा अलग नहीं हूँ | बिना टिकेट रेल यात्रा करना | अपने से बड़े छात्रावास के कर्मचारियों से काम करवाना; उन्हें डांटना | दस लोगों के बीच खुद को स्थापित करने की होड़ में किसी को कुछ भी कह देना |खुद जिस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए यहाँ हूँ उस पर ध्यान न देना | ऐसी  बहुत सी बातें दिमाग में कौंधने लगती है | मन खिन्न हो जाता है; कॉपी कलम बंद कर देता हूँ। सोचने बैठ जाता हूँ |कभी खुद की मानसिक कमजोरी का अहसास होता है,कभी लगता है सायद ऐसे जीवन आगे बढ़ता है ...
कुछ ना समझ  पाने की स्थिति में मुझे एहसास होता है ..................................
बुरा जो देखन मै चला बुरा न मिलिया कोई
जो दिल खोजा आपनो मुझ सा बुरा न कोई ||||
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बोलता हूँ कबीर बाबा की जै .....और सो जाता हूँ ..

Wednesday, 23 March 2016

जूठन

एक ओर जहा जूठन पढ़कर  दलित वर्ग  के युवाओ  , नवयुवको  में जोश  ,उत्साह  का प्रवाह  होने  की  सम्भावनाये  है  वही साथ ही साथ  दूसरी ओर बहुत सरे नवयुवको  में  मनुष्यता  के प्रति  द्वेष ,प्रतिकार  एवं  बदले  की भावना  का उदय होना भी  स्वाभविक  है | 
                                      जूठन  किसी  एक  दलित  या   चूहड़  मात्र की  कहानी  न  होकर  समाज की  बुरइयो  , कुरीतियों को  उजागर कर पाने का एक बेहतर  और  सफल  प्रयास  है  ओम प्रकाश  जी  की  आत्मकथा  जूठन  युवाओ  को एक  नयी  दिशा  प्रदान करेगी  | जहाँ  जातिवादी , धर्मवादी  मानसिकता  से ऊपर  उठकर  हमारे  समाज का  नवयुवक  राष्ट्रवादी  मानसिकता  धारण  कर  सकेगा  जो सीधे  देश  एवं  राष्ट्र  के  निर्माण  में  अपनी  भूमिका  निभाएगा ..................
                                                                                                                                         अनन्त  निमोशी