Thursday, 18 December 2014

कलम का सिपाही

                     देश की आजादी के बाद २२ अक्टूबर १९४७ परसपुर गोंडा उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाले श्री रामनाथ सिंह जी उर्फ़ अदम गोंडवी जी स्वाभाव से ही क्रन्तिकारी प्रवृति के थे देश की आजादी के बाद क्रांतिकारियों का दौर ख़तम सा हो गया | ऐसे समय में सरकारी विभागो  में सरकारी कर्मचारियों ने  एवम अधिकारियो ने वो करना शुरू किया जो सायद डलहौजी ने भी नहीं किया, देश की सभ्य और सुशिक्षित कही जाने वाली जनता ने वो किया जो सायद आजादी के पहले डायर ने भी नहीं किया | लोगो को डराने धमकाने की नीति चरम पर पहुच गई| दोस्तों दुश्मन भेदिये से लड़ना आसान होता है पर जब अपने ही लोग भेडीया बन जाये तो उनसे लड़ना मुस्किल हो जाता है और यहाँ पर तो सभी अपने थे | ऐसी विषम परिस्थितियों में श्री गोंडवी जी ने जो लड़ाई लड़ी जो आवाज उठाई उसका सीधा असर हम अपने आज के समाज पर देख रहे है | सरकारी दफ्तरों में अफसरों की घूसखोरी हो या बड़े नेताओ की अपनी मनमानी | चाहे धनी का गरीब पर अत्याचार हो या सवर्णों का दलितों पर बर्बरता पूर्ण आचरण गोंडवी जी ने अपनी कविता के माध्यम से अपना विरोध और लोगो की नाराजगी हमेशा  जाहिर की |
                      समाज सुधारक एवं क्रांतिकारी  कलम के इस सिपाही को मेरा शत शत नमन |
                                                                                                                                       निमोशी                    
                                                                                                                                                                   

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