मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जो सोच सकता है उसकी अभिव्यकि कर सकता है अपने आस पास घट रही घटनाओं का आंकलन कर सकता कार्य और कारण के बीच सम्बन्ध स्थापित कर सकता है| अर्थात समझ बूझ सकता है और इसी आधार पर सीख कर सामाजिक प्राणी होने की आधारशिला विकसित करता है | सीधे शब्दों में मनुष्य एक नकलची प्रवृति का प्राणी है जो देख-देख के सीखता है | और फिर उसमे परिमार्जन करता है और अपनी समझ के आधार पर विकास करता है | हर इंसान के ऊपर उसके आस पास की वस्तुओं का घटनाओं का वातावरण का प्रभाव पड़ना बड़ी ही स्वाभाविक प्रक्रिया है क्योकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ती समाज द्वारा ही संभव है | इस प्रकार के प्रभाव ने ही मनुष्य को जंगली, बर्बर, आदिमानव से सामाजिक इंसान बना दिया | और जैसे-जैसे मनुष्य सभ्य होता गया मनुष्य सीखने के लिए अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए ढेर सारे तरीके इजात करने लगा | कभी पक्षियों द्वारा संदेशों का सम्प्रेषण किया तो कभी हरकारों द्वारा | आज स्थिति बदल चुकी है| मनुष्य ने हवाओं के माध्यम से संदेशों का सम्प्रेषण करने की कला में महारत हासिल कर ली है | टी वी , रेडियो ,टेलीफोन ,फैक्स ,कंप्यूटर इन्टरनेट जैसे तमाम स्रोत है जिसके माध्यम से हम सूचनाओ को बड़ी ही आसानी से बहुत कम समय में एक बड़े समूह तक पंहुचा सकते है | टेलीविज़न उनमे से एक है जिसके माध्यम से सूचनाओं का सम्प्रेषण बड़ी आसानी से होता है | टेलीविज़न के कार्यक्रमों समाचार, रियलिटी शो इन्फोटेन्मेंट शो और सिनेमा द्वारा यह प्रक्रिया चलती रहती है | और मनुष्य और समाज को प्रभावित करती रहती है | सिनेमा समाज को प्रभावित करने की दौड़ में सबसे आगे है क्योकि यह एक दृश्य श्रव्य माध्यम है |
cinema by nimoshi's view!
ReplyDeleteइस दृश्य एवं श्रव्य माध्यम को हमे लेख माध्यम से हमे रूबरू कराने के लिए धन्यवाद !
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