Wednesday, 6 April 2016

क्या लिख दूं

आज का आज लिख दूं
शासकों का  इतिहास लिख दूं
बर्बरता की कहानी पर
बैठे बिठाये किताब लिख दूं

सहम जाता हूँ मै सच्चाई लिखते लिखते
कोशिश करता हूँ  इनकी क्रूर बीरता की बड़ाई लिख दूं
कलम गर न करे बगावत तो वाहवाही लिख दू
भूल जातें  हैं लोग ऊँची इमारते देख कर
गरीबों के घुटन की दुहाई लिख दूं


अनंत निमोशी

2 comments:

  1. chhuparustam ji aaj pta chla itni achchi poetry bhi kr lete ho

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  2. बेहतरीन निमोषी जी !

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