आज का आज लिख दूं
शासकों का इतिहास लिख दूं
बर्बरता की कहानी पर
बैठे बिठाये किताब लिख दूं
सहम जाता हूँ मै सच्चाई लिखते लिखते
कोशिश करता हूँ इनकी क्रूर बीरता की बड़ाई लिख दूं
कलम गर न करे बगावत तो वाहवाही लिख दू
भूल जातें हैं लोग ऊँची इमारते देख कर
गरीबों के घुटन की दुहाई लिख दूं
अनंत निमोशी
शासकों का इतिहास लिख दूं
बर्बरता की कहानी पर
बैठे बिठाये किताब लिख दूं
सहम जाता हूँ मै सच्चाई लिखते लिखते
कोशिश करता हूँ इनकी क्रूर बीरता की बड़ाई लिख दूं
कलम गर न करे बगावत तो वाहवाही लिख दू
भूल जातें हैं लोग ऊँची इमारते देख कर
गरीबों के घुटन की दुहाई लिख दूं
अनंत निमोशी
chhuparustam ji aaj pta chla itni achchi poetry bhi kr lete ho
ReplyDeleteबेहतरीन निमोषी जी !
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