एक ओर जहा जूठन पढ़कर दलित वर्ग के युवाओ , नवयुवको में जोश ,उत्साह का प्रवाह होने की सम्भावनाये है वही साथ ही साथ दूसरी ओर बहुत सरे नवयुवको में मनुष्यता के प्रति द्वेष ,प्रतिकार एवं बदले की भावना का उदय होना भी स्वाभविक है |
जूठन किसी एक दलित या चूहड़ मात्र की कहानी न होकर समाज की बुरइयो , कुरीतियों को उजागर कर पाने का एक बेहतर और सफल प्रयास है ओम प्रकाश जी की आत्मकथा जूठन युवाओ को एक नयी दिशा प्रदान करेगी | जहाँ जातिवादी , धर्मवादी मानसिकता से ऊपर उठकर हमारे समाज का नवयुवक राष्ट्रवादी मानसिकता धारण कर सकेगा जो सीधे देश एवं राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएगा ..................
अनन्त निमोशी
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