रिश्ता (भाई ) होने का अर्थ
गलत होने पर समर्थन करना ये भाई होने का भाव नहीं प्रस्तुत करता बल्कि गलत होने पर उसके दंड में सहभागिता व्यक्ति के भाई होने का अर्थ प्रस्तुत करती है| यही हमारे समाज और संस्कृति की पहचान है |
न्याय अपनी जगह ,अन्याय अपनी जगह और रिश्ते अपनी जगह | सनातन धर्म भी इसी बात का समर्थन करता है की किसी व्यक्ति के कर्मो का फल उसके परिवार को भी भुगतना पड़ता है अपने भाई से खुस होना, नाराज होना इससे सुख दुःख की सहभागिता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता | यही प्रकृति का नियम
है; और नियति भी इसी नियम का पालन करती आयी है | परन्तु आधुनिकता के इस युग में इंसान नियति के इस नियम को बदलने की कोशिश में लगा है | ऐसी अवस्था ही क़यामत का लक्षण होती है |
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